ऑनलाइन उत्पीड़न, कैसे प्रतिक्रिया दें?
21 नवंबर 2019 को प्रकाशित

हमारे रोज़मर्रा में स्मार्टफ़ोन और सोशल नेटवर्क की व्यापक और लगातार मौजूदगी के साथ, ऑनलाइन उत्पीड़न अब उन तमाम बुराइयों की लंबी फ़ेहरिस्त में एक असली, ख़ासतौर पर चिंताजनक जगह बना चुका है जो वेब पर हमारी मौजूदगी को सड़ा रही हैं।
मेरा यह कहने का इरादा बिलकुल नहीं कि इंटरनेट महज़ भ्रष्टता की एक जगह है जो समूची मानवता को तबाह कर देगी, नहीं, अभी नहीं, इंटरनेट सचमुच बहुत अच्छी चीज़ें लाता है, यह नकारा नहीं जा सकता। दूसरी ओर यह वाकई नफ़रत के पनपने का एक अहम मंच है, और कुछ लोगों के हिंसक बर्ताव पर एक विशाल आवर्धक लेंस, जिन्हें कभी-कभी अपने विरोधियों के खिलाफ़ बिना नाप-तौल उछाली गई अपनी बातों की हिंसा और घिनौनेपन का अहसास तक नहीं होता।
यह परिघटना सबको छूती है, ज़ाहिर है किशोरों को, जो अक्सर झेले जाने वाले उत्पीड़न को सह पाने में कम सक्षम होते हैं, पर अल्पसंख्यकों को भी, सार्वजनिक हस्तियों को, कार्यकर्ताओं को, और आम तौर पर हर उस व्यक्ति को जो सोशल नेटवर्क पर सार्वजनिक गतिविधि करने की हिम्मत करता है।
इसके सामने कुछ चीज़ें संगठित हो रही हैं, क़ानून बदल या मज़बूत हो रहे हैं, ख़ासकर Marlène Schiappa की बदौलत जो इस विषय पर काम कर रही हैं (कभी-कभी बेढंगे तरीके से, चूँकि उन्हें ख़ुद बुर्क़ा पहनने वाली औरतों के खिलाफ़ उत्पीड़न को हवा देने में ज़्यादा दिक्कत नहीं होती, पर यह एक अलग विषय है जिस पर मैं शायद किसी और दिन बात करूँगा)।
खैर। ऑनलाइन उत्पीड़न पहले से यहीं है, यह बड़े पैमाने पर है, यह कई रूप लेता है, और लोगों को तबाह करने के लिए यह नए क़ानूनों का इंतज़ार नहीं करेगा, तो आज ही से सही बर्ताव और इससे बचाव की चाबियाँ रखनी होंगी। हम इन कुछ पंक्तियों से मदद करने की कोशिश करेंगे।
चेतावनी न देना?
कुछ लोग आपको उत्पीड़न से बचने के तरीके बताएँगे। किन विषयों पर बात न करें, किन नेटवर्क से बचें, कौन-से बर्ताव आपकी रक्षा कर सकते हैं। पर नहीं! आपको किसी भी चीज़ से बचने की ज़रूरत नहीं। आप जो कहना, दिखाना, बचाना चाहें, उससे फ़र्क नहीं पड़ता। आपको जो आप हैं वह होने का, अपने मक़सद के लिए सोचने और लड़ने का, यहाँ और हर जगह संघर्ष करने का हक़ है, ऐसी कोई वजह नहीं कि आप ही को छिपना पड़े या अपनी बातों और अपनी लड़ाइयों में ख़ुद को सीमित करना पड़े।
ऑनलाइन उत्पीड़न, बिलकुल सड़क पर होने वाले उत्पीड़न की तरह, लोगों को इसके लिए दोषी ठहराकर नहीं लड़ा जाना चाहिए कि वे जो हैं वह हैं। ग़लती उत्पीड़कों, ट्रोलों, भीड़ की है। कभी आपकी नहीं।
हाँ पर फिर, ख़ुद को कैसे बचाएँ?
हम ख़ुद को कई तरीकों से बचाते हैं :
– हम अपने इर्द-गिर्द लोगों को रखने की कोशिश करते हैं, अपने संघर्षों में अकेले न रहने की, बाहरी शत्रु व्यक्तियों को लेकर अपने डर और बेचैनी को साझा करने की, बुरे पलों को बाँटकर, अपने करीबियों से बात करके, चाहे वे डिजिटल हों या नहीं। हर हाल में हम उत्पीड़न के सामने अकेले नहीं रहते और संवाद करते हैं।
– हम स्क्रीनशॉट लेते हैं, जो कुछ भी आता है उसे बिलकुल संग्रहित करते हैं, गालियाँ, धमकियाँ, हम समय, उन अकाउंट या व्यक्तियों के नाम नोट करते हैं जो आपको गाली देते, अपमानित करते, बदनाम करते हैं।
– एक बार संग्रहित करने के बाद, हम सबसे हिंसक ट्रोलों को छिपाते और ब्लॉक करते हैं, कभी-कभी इसमें वक्त लगता है, पर हम सख़्ती बरतने से नहीं हिचकते, हम कुछ नहीं छोड़ते, ज़बानी हिंसा की शुरुआत भी नहीं।
– हम जवाब नहीं देते, हम ख़ुद को बचाने की कोशिश नहीं करते! हालात के मुताबिक़ हम शायद कोई विचार, कोई स्रोत बता सकते हैं, अपनी अंतरात्मा को शांत करने और किसी बात को समझाने के लिए, पर ट्रोलों को खिलाने और घंटों जूझने की कोशिश करने का कोई फ़ायदा नहीं। ज़्यादातर मामलों में आपकी चुप्पी ही आपका सबसे अच्छा बचाव होगी।
– हम अपने अकाउंट को निजी कर लेते हैं, कम से कम अस्थायी रूप से अगर हम दबाव अच्छे से न झेल पाएँ, इससे उत्पीड़न का एक हिस्सा टलेगा, ख़ासकर निजी संदेश (DM) जो आपको अब नहीं मिलेंगे।
– हम अपनी बातें मिटाने से बचते हैं, सिवाय ज़ाहिर है तब जब आपको उन पर पछतावा हो या किसी निजी कारण से आप उन्हें अपना न मानें। पर मिटाकर, आप उन ट्रोलों के साथ उत्पीड़न की मशीन फिर चला सकते हैं जिन्होंने आपकी बातें/फोटो कैद कर ली होंगी, और उत्पीड़न एक ऐसा दूसरा रूप ले सकता है जिसमें आपका ज़िक्र सचमुच नहीं होगा, जो शायद आपको दिखेगा भी नहीं, पर जो इसीलिए और भी ज़हरीला हो सकता है।
क्या हम शिकायत दर्ज कराएँ?
यह आप पर निर्भर है। सही जवाब है हाँ। पर अगर यह आपको घबराता है, बहुत जटिल लगता है, और जो उत्पीड़न आप झेल रहे हैं वह आपको सहनीय और क्षणिक लगता है, तो शिकायत न करने के लिए कोई आपको दोष नहीं देगा। हम बख़ूबी इंतज़ार का रुख़ चुनने का फ़ैसला कर सकते हैं।
दूसरी ओर, अगर आप किसी तरह का डर महसूस करें, अगर आपको शारीरिक धमकियाँ मिलें, अगर लोग आपके बारे में निजी बातें, फोटो, आपका पता, जानकारियाँ फैलाएँ, या आम तौर पर अगर यह सब आपको बेकाबू लगे। तो हाँ आप ज़ाहिर है शिकायत दर्ज कराते हैं! अगर यह आपको चिंतित करता है तो किसी के साथ जाइए।
क़ानून आज काफ़ी साफ़ है, उत्पीड़न का मतलब है हर वह बर्ताव जिसका मक़सद आपकी शारीरिक सेहत या व्यापक रूप से आपके मानसिक संतुलन को बिगाड़ना हो। यह व्यापक है, और अच्छा ही है। किसी भी इंटरनेट माध्यम (सोशल नेटवर्क, ब्लॉग, फ़ोरम, वगैरह) पर बार-बार अपमानजनक या गाली देने वाली बातें, एक अपराध है जिस पर आपराधिक दंड लग सकता है। भले ही बातें निजी हों।
लागू होने वाली सज़ाएँ भारी हैं, ठीक-ठीक कहें तो :
अगर उत्पीड़क बालिग़ है, उसे दो साल जेल और 30,000 यूरो जुर्माने का ख़तरा है। अगर पीड़ित की उम्र 15 साल से कम हो, तो सज़ाएँ 3 साल जेल और 45,000 यूरो जुर्माने तक पहुँच सकती हैं।
अगर उत्पीड़क 13 साल से ज़्यादा का नाबालिग़ है और उसका पीड़ित 15 साल से ज़्यादा का हो, तो उसे एक साल क़ैद और 7500 यूरो जुर्माने का ख़तरा है। अगर उसका पीड़ित 15 साल से कम का हो, तो सज़ा बढ़ाकर 18 महीने कर दी जाती है।
अगर उत्पीड़क 13 साल से कम का नाबालिग़ है, तो बाल न्यायाधीश शैक्षिक प्रकृति के दंड ले सकता है।

और ठोस रूप में, शिकायत?
अगर आपने शिकायत दर्ज कराने का फ़ैसला किया है, तो आपको शिकायत दर्ज कराने के लिए थाने या जेंडरमरी जाना होगा।
अपने सारे सबूत साथ रखें, अगर मुमकिन हो तो प्रिंट किए हुए। अगर आप अपने उत्पीड़क का नाम नहीं जानते, तो अज्ञात के खिलाफ़ शिकायत करें। अगर आप नाबालिग़ हैं तो आपको अपने माता-पिता या क़ानूनी अभिभावकों के साथ होना चाहिए, और अच्छा ही है, इस तरह के मामलों में उन्हें शामिल करना और उनसे बात करना अहम है।
हम आख़िरी बार याद दिलाते हैं, अगर आप उत्पीड़न के शिकार हैं, तो आपको अकेले नहीं रहना चाहिए, किसी भी सूरत में नहीं। और सबसे बढ़कर, अच्छे से समझ लें कि इसमें आपकी कोई ग़लती नहीं। आप पीड़ित हैं और आपके पास अधिकार हैं।
फोटो क्रेडिट : DR
द्वारा Paingout



